आंध्र प्रदेश के एक गांव में खेले जा रहे स्थानीय क्रिकेट मैच में उस दिन बल्ला कम, ड्रामा ज्यादा चला। एक खिलाड़ी को बैटिंग नहीं मिली, टीम मैनेजमेंट (यानी दोस्तों की गुटबाजी) से दुखी होकर वह मैदान से निकला और कुछ देर बाद ट्रैक्टर लेकर लौटा। इसके बाद जो हुआ, उसने पिच को इतिहास और वीडियो को वायरल बना दिया – सबके सामने पिच ही जोत कर रख दी।
फील्डिंग अनलिमिटेड, बैटिंग जीरो
रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवक पूरे मैच में सिर्फ फील्डिंग करता रहा; गेंद पकड़ो, भागो, थ्रो करो – यानी पसीना उसका, मज़ा दूसरों का।
जैसे‑जैसे ओवर खत्म होते गए, उसका सब्र भी खत्म होता गया, लेकिन आखिरी तक उसे एक भी गेंद फेस करने नहीं दी गई।
मैच खत्म हुआ, टीम ने सेल्फी ली, और वह चुपचाप गुस्से की धूप में पकता हुआ घर चला गया।
पिच का पोस्ट‑मैच ‘री‑डेवलपमेंट’
कुछ देर बाद वह ट्रैक्टर लेकर वापस पहुंचा और बिना कोई टॉस किए सीधे पिच पर आ गया।
- वीडियो में साफ दिखता है कि वह पिच पर ट्रैक्टर चलाते हुए मिट्टी को पूरा उलट‑पुलट देता है, जैसे कह रहा हो: “अगर मुझे बैट नहीं मिला, तो किसी को भी क्रिकेट नहीं मिलेगा।”
- बाकी खिलाड़ी दूर खड़े रह जाते हैं, कोई रोकने जाता भी है तो शायद अपने जूते गंदे हो जाने के डर से तुरंत ही पीछे हट जाता है।
मैच वहीं खत्म, पिच अगले कुछ दिनों के लिए खेत बन गई।
इंटरनेट की तालियां और ताने
वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही लोग दो हिस्सों में बंट गए – “लिखित शिकायत” का समर्थक वर्ग और “ट्रैक्टर से शिकायत” का फैन क्लब।
- कई लोगों ने मज़ाक में लिखा कि यह है “असली खिलाड़ी, जो ग्राउंड बदल देता है।”
- कुछ ने कहा कि हमारे गली‑मुहल्ले में भी ऐसे दोस्त हैं जो खुद ओपनिंग करते हैं और बाकी को सिर्फ बाउंड्री पर खड़ा कर देते हैं, फर्क बस इतना है कि हमारे पास ट्रैक्टर नहीं है।
फिर भी, खेल भावना की किताब में यह घटना एक अलग ही अध्याय जोड़ती है – “जब फेयर प्ले न मिले, तो फील्ड ही प्लाउ कर दो।”