घाना में एक स्वयंभू पैगंबर, Ebo Noah, ने हाल ही में दावा किया कि दुनिया पर बाइबिल जैसी प्रलयकारी बाढ़ आने वाली है। तारीखें भी लगभग फिक्स थीं: दिसंबर के अंत से ऐसी बारिश शुरू होगी कि पूरी दुनिया डूब जाएगी। लोग उसके बनाए लकड़ी के आर्क्स पर पहुंचने लगे, कुछ ने तो इसे “रियल‑टाइम नूह की नाव” का टिकट समझ लिया।
प्रलय की PR कैंपेन
वीडियो में Ebo Noah बड़े जोश के साथ ऐलान करता दिखता है कि भगवान ने उसे सपने में चेतावनी दी है – “फ्लड आ रहा है, जल्दी से नाव पर चढ़ो।”
- हजारों लोग जिज्ञासा, डर और आस्था के मिश्रण में वहां पहुंचने लगे, मानो दुनिया खत्म होने से पहले एक आखिरी टूरिस्ट स्पॉट देखना हो।
- उसके समर्थक इसे “आध्यात्मिक सुरक्षा योजना” बता रहे थे, जिसमें टिकट मुफ्त है लेकिन डर अनलिमिटेड।
जब बाढ़ नहीं आई…
तय दिन आया, बादल आए, बरसात सामान्य रही, दुनिया सामान्य तरीके से जारी रही। बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम, छोटे शहरों में बिजली कट और सोशल मीडिया पर मीम्स – सब पहले जैसे।
जब कुछ खास नहीं हुआ तो Ebo Noah ने नया संदेश जारी किया: ईश्वर ने प्रार्थनाओं से प्रसन्न होकर प्रलय फिलहाल “पोस्टपोन” कर दी है।
व्यंग्य में लोगों ने कहा कि अब से महंगाई, बेरोजगारी और पॉलिटिक्स का नाम भी “मानव निर्मित प्रलय” ही रख देना चाहिए, कम से कम टाइम पर तो आ जाती है।
फिर भी लोग क्यों जा रहे हैं?
दिलचस्प बात यह है कि प्रलय टलने के बाद भी लोग वहां पहुंच रहे हैं – कोई कंटेंट बनाने, कोई curiosity में, कोई सच‑मुच डर के मारे।
आलोचकों का कहना है कि ऐसी भविष्यवाणियां हर दौर में आती हैं; फर्क बस इतना है कि अब इनके साथ इंस्टाग्राम रील और लाइव स्ट्रीमिंग का फीचर फ्री में मिलता है।
आधुनिक दुनिया में यह घटना याद दिलाती है कि वैज्ञानिक प्रगति चाहे जितनी हो जाए, “दुनिया कल खत्म होने वाली है” वाला कॉन्टेंट हमेशा अच्छा चलता रहेगा – बस तारीख बदलती रहती है, सर्वनाश नहीं आता।