ब्रिटेन से आई एक खबर ने पूरी दुनिया के पालतू मालिकों को एक साथ सिहरने पर मजबूर कर दिया। एक साधारण दिखने वाली, हमेशा की तरह क्यूट बिल्ली हल्की सी बीमार हुई, मालिक उसे प्यार‑प्यार कहता हुआ वेट क्लिनिक ले गया, और वापस आया तो हाथ में दवाइयों से ज्यादा भारी बिल था – करीब 400 डॉलर (लगभग 33,000 रुपये)।
बीमारी छोटी, बिल XXL साइज
जांच के बाद पता चला कि बिल्ली की हालत उतनी गंभीर नहीं थी जितना मालिक का बैंक अकाउंट दिखाने लगा।
- कुछ बेसिक टेस्ट, एक एक्स‑रे, थोड़ी दवाएं और सलाह—और बिल बन गया ऐसा कि इंसान सोचे, खुद का चेक‑अप भी यहीं ही करवा ले।
- इलाज तो हो गया, लेकिन मालिक को अब हर छींक पर ये डर सताता है कि “कहीं अगली बार यह बिल्ली एमआरआई मांगने न लग जाए।”
सोशल मीडिया पर लोगों ने कमेंट किया कि यह बिल्ली अब “प्राइवेट अस्पताल वाली क्लास” की है, जो इंसानों से बेहतर इंश्योरेंस पर चल रही है।
इंटरनेट का कलेक्टिव रोना‑धोना
महंगाई से परेशान यूजर्स को यह घटना एकदम रिलेटेबल लगी।
- कई लोगों ने लिखा कि आजकल पेट पालना नहीं, “मिनी ईएमआई प्रोजेक्ट” है।
- कुछ ने मज़ाक में लिखा कि इंसान खुद बीमार हो तो हो जाए, पहले पालतू का इलाज कराओ, वरना घर में लोकतांत्रिक माहौल खराब हो जाता है।
वेट क्लिनिक के बाहर बैठे कई बिल्लियों और कुत्तों ने भी शायद सोचा होगा, “जितना पैसा लग रहा है, अब थोड़ा ड्रामा तो करना ही पड़ेगा।”
महंगे वेट बिल की सच्चाई
सच यह है कि ब्रिटेन जैसे देशों में वेट के खर्च के कारण कई परिवार पालतू छोड़ने को मजबूर हैं।
शहरों की आर्थिक हालत ऐसी हो चली है कि लोग यह तक कह रहे हैं – “बचपन में बोलते थे डॉक्टर बनो, कोई यह नहीं बताता था कि बिल्ली का डॉक्टर सबसे ज्यादा कमाएगा।”